Explanations:
संस्कृत में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं– कर्त्तृवाच्य, कर्मवाच्य एवं भाववाच्य। कर्त्तृवाच्य में कर्ता पद प्रथमा विभक्ति का होता है जैसे छात्र: श्लोकं पठति। कर्मवाच्य में कर्तापद तृतीया विभक्ति में तथा कर्म प्रथमा विभक्ति में होता है- जैसे छात्रेण श्लोक: पठ्यते। अकर्मक धातु में कर्म नहीं होने से क्रिया की प्रधानता होने पर भाववाच्य के प्रयोग सिद्ध होते हैं। जैसे–राम: तिष्ठति का रामेण स्थीयते। अत: उपरोक्त प्रश्न में कर्त्तृवाच्य है।