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Q: डाई पेनिट्रेंट टेस्टिंग का प्रयोग ........ का पता लगाने के लिए किया जा सकता है?
  • A. केवल सतह पर दोष
  • B. केवल सतह से नीचे दोष
  • C. सतह और सतह से नीचे दोनों दोष
  • D. सतह और सतह के समीप दोष
Correct Answer: Option A - डाई पेनिट्रेंट टेस्टिंग का प्रयोग केवल सतह पर दोष का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इस टेस्टिंग में एक लिक्विड पेनिट्रेंट डाई जाँच की जाने वाली वस्तु पर उड़ेली जाती है। कैपिलरी प्रक्रिया के द्वारा लिक्विड मैटेरियल के दोषों में रिस जाता है। जब तक डेवेलपर मैटेरियल पर उड़ेला जाता है। यह डेवेलपर पेनिट्रेंट को वापस खींच लेता है और सतह दिखने लगता है। ऐसा करने से क्रैक को देखना बहुत आसान हो जाता है। इसका प्रयोग क्रैक , छेद और अन्य सतह पर दोषों को जाँचने के लिए किया जा सकता है।
A. डाई पेनिट्रेंट टेस्टिंग का प्रयोग केवल सतह पर दोष का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इस टेस्टिंग में एक लिक्विड पेनिट्रेंट डाई जाँच की जाने वाली वस्तु पर उड़ेली जाती है। कैपिलरी प्रक्रिया के द्वारा लिक्विड मैटेरियल के दोषों में रिस जाता है। जब तक डेवेलपर मैटेरियल पर उड़ेला जाता है। यह डेवेलपर पेनिट्रेंट को वापस खींच लेता है और सतह दिखने लगता है। ऐसा करने से क्रैक को देखना बहुत आसान हो जाता है। इसका प्रयोग क्रैक , छेद और अन्य सतह पर दोषों को जाँचने के लिए किया जा सकता है।

Explanations:

डाई पेनिट्रेंट टेस्टिंग का प्रयोग केवल सतह पर दोष का पता लगाने के लिए किया जा सकता है। इस टेस्टिंग में एक लिक्विड पेनिट्रेंट डाई जाँच की जाने वाली वस्तु पर उड़ेली जाती है। कैपिलरी प्रक्रिया के द्वारा लिक्विड मैटेरियल के दोषों में रिस जाता है। जब तक डेवेलपर मैटेरियल पर उड़ेला जाता है। यह डेवेलपर पेनिट्रेंट को वापस खींच लेता है और सतह दिखने लगता है। ऐसा करने से क्रैक को देखना बहुत आसान हो जाता है। इसका प्रयोग क्रैक , छेद और अन्य सतह पर दोषों को जाँचने के लिए किया जा सकता है।