Correct Answer:
Option B - डुकृञ् करणे (कृ) धातु: ‘तनादिगणस्य’ वर्तते। ‘कृ’ धातु तनादि गण के अन्तर्गत आती है। तनादिगण की प्रथम धातु तन् है, जिसका अर्थ है फैलाना। इसके अन्तर्गत 10 धातुएँ आती हैं। प्रमुख धातु इस प्रकार है- तन्, कृ आदि। इसमें ‘उ’ विकरण जुड़ता है।
B. डुकृञ् करणे (कृ) धातु: ‘तनादिगणस्य’ वर्तते। ‘कृ’ धातु तनादि गण के अन्तर्गत आती है। तनादिगण की प्रथम धातु तन् है, जिसका अर्थ है फैलाना। इसके अन्तर्गत 10 धातुएँ आती हैं। प्रमुख धातु इस प्रकार है- तन्, कृ आदि। इसमें ‘उ’ विकरण जुड़ता है।