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Q: डुकृञ् करणे (कृ) धातु: कस्य गणस्य वर्तते?
  • A. रुधादिगणस्य
  • B. तनादिगणस्य
  • C. दिवादिगणस्य
  • D. अदादिगणस्य
Correct Answer: Option B - डुकृञ् करणे (कृ) धातु: ‘तनादिगणस्य’ वर्तते। ‘कृ’ धातु तनादि गण के अन्तर्गत आती है। तनादिगण की प्रथम धातु तन् है, जिसका अर्थ है फैलाना। इसके अन्तर्गत 10 धातुएँ आती हैं। प्रमुख धातु इस प्रकार है- तन्, कृ आदि। इसमें ‘उ’ विकरण जुड़ता है।
B. डुकृञ् करणे (कृ) धातु: ‘तनादिगणस्य’ वर्तते। ‘कृ’ धातु तनादि गण के अन्तर्गत आती है। तनादिगण की प्रथम धातु तन् है, जिसका अर्थ है फैलाना। इसके अन्तर्गत 10 धातुएँ आती हैं। प्रमुख धातु इस प्रकार है- तन्, कृ आदि। इसमें ‘उ’ विकरण जुड़ता है।

Explanations:

डुकृञ् करणे (कृ) धातु: ‘तनादिगणस्य’ वर्तते। ‘कृ’ धातु तनादि गण के अन्तर्गत आती है। तनादिगण की प्रथम धातु तन् है, जिसका अर्थ है फैलाना। इसके अन्तर्गत 10 धातुएँ आती हैं। प्रमुख धातु इस प्रकार है- तन्, कृ आदि। इसमें ‘उ’ विकरण जुड़ता है।