Correct Answer:
Option A - ‘‘ढेल सो बनाय आय मेलत सभा के बीच,
लोगन कवित्त कीन्हों खेल करि जान्यो है।’’ ये काव्य पंक्तियाँ रीतिकालीन रीतिमुक्त कवि ‘ठाकुर’ की हैं। रामचंद्र शुक्ल ने ठाकुर को ‘सच्ची उमंग’ का कवि कहा है तो घनानंद को वे ‘‘प्रेम की पीर का कवि’’ मानते हैं। देव के संदर्भ में रामचंद्र शुक्ल का कहना है कि–‘‘वे आचार्य और कवि दोनों रूपों में हमारे सामने आते हैं।’’ भिखारीदास के संदर्भ में कहते हैं कि–‘‘इनकी रचना कलापक्ष में संयत और भावपक्ष में रंजनकारिणी हैं।’’ प्रमुख पंक्ति एवं उनके रचनाकार हैं-
अति सुधौ सनेह को मारगु हैं।
जहँ नैकु सयानप बाँक नहीं।। (घनानंद)
अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणा लीन।
अधम व्यंजना रस बिरस, उलटी कहत नवीन।। –(देव)
आगे के कवि रीझिहै, तो कविताई न तो।
राधा कन्हाई सुमिरन कौ बहानौ हैं।। –(भिखारीदास)
A. ‘‘ढेल सो बनाय आय मेलत सभा के बीच,
लोगन कवित्त कीन्हों खेल करि जान्यो है।’’ ये काव्य पंक्तियाँ रीतिकालीन रीतिमुक्त कवि ‘ठाकुर’ की हैं। रामचंद्र शुक्ल ने ठाकुर को ‘सच्ची उमंग’ का कवि कहा है तो घनानंद को वे ‘‘प्रेम की पीर का कवि’’ मानते हैं। देव के संदर्भ में रामचंद्र शुक्ल का कहना है कि–‘‘वे आचार्य और कवि दोनों रूपों में हमारे सामने आते हैं।’’ भिखारीदास के संदर्भ में कहते हैं कि–‘‘इनकी रचना कलापक्ष में संयत और भावपक्ष में रंजनकारिणी हैं।’’ प्रमुख पंक्ति एवं उनके रचनाकार हैं-
अति सुधौ सनेह को मारगु हैं।
जहँ नैकु सयानप बाँक नहीं।। (घनानंद)
अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणा लीन।
अधम व्यंजना रस बिरस, उलटी कहत नवीन।। –(देव)
आगे के कवि रीझिहै, तो कविताई न तो।
राधा कन्हाई सुमिरन कौ बहानौ हैं।। –(भिखारीदास)