Correct Answer:
Option A - आवृतबीजी (Angiosperm) में दोहरा निषेचन होता है।
द्वि-निषेचन- एक सहायक कोशिका में प्रवेश करने के पश्चात् पराग नलिका द्वारा सहायक कोशिका के जीवद्रव्य में दो नर युग्मक अवमुक्त किये जाते हैंं। इनमें से एक नर युग्मक अंड कोशिका की ओर गति करता है और केन्द्रक के साथ संगलित होता है, जिससे युग्मक संलयन पूर्ण होता है। जिसके परिणाम में एक द्विगुणित कोशिका युग्मजन की रचना होती है। दूसरा नर युग्मक केन्द्रीय कोशिका में स्थित दो ध्रुवीय केन्द्रिका की ओर गति करता है और उनसे संगलित होकर त्रिगुणित बनाता है। इसे त्रिसंलयन कहते हैं। चूँकि एक भ्रूण कोश में दो प्रकार के संलयन, युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन स्थान लेते हैं। अत: इस परिघटना को दोहरा निषेचन कहते है। त्रिसंलन के बार केन्द्रीय कोशिका प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका बन जाती है तथा भ्रूणपोष के रूप में विकसित होने लगाती है। जबकि युग्मनज एक भ्रूण के रूप में विकसित होता है।
आवृतबीजी के अंतर्गत उन पौधों को रखा जाता है जिसके बीजों में आवरण पाया जाता है। इस समुदाय के पौधों को पुष्पीय पादप भी कहते हैं। क्योंकि इनमें पूर्ण विकसित पुष्प पाये जाते हैं।
A. आवृतबीजी (Angiosperm) में दोहरा निषेचन होता है।
द्वि-निषेचन- एक सहायक कोशिका में प्रवेश करने के पश्चात् पराग नलिका द्वारा सहायक कोशिका के जीवद्रव्य में दो नर युग्मक अवमुक्त किये जाते हैंं। इनमें से एक नर युग्मक अंड कोशिका की ओर गति करता है और केन्द्रक के साथ संगलित होता है, जिससे युग्मक संलयन पूर्ण होता है। जिसके परिणाम में एक द्विगुणित कोशिका युग्मजन की रचना होती है। दूसरा नर युग्मक केन्द्रीय कोशिका में स्थित दो ध्रुवीय केन्द्रिका की ओर गति करता है और उनसे संगलित होकर त्रिगुणित बनाता है। इसे त्रिसंलयन कहते हैं। चूँकि एक भ्रूण कोश में दो प्रकार के संलयन, युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन स्थान लेते हैं। अत: इस परिघटना को दोहरा निषेचन कहते है। त्रिसंलन के बार केन्द्रीय कोशिका प्राथमिक भ्रूणपोष कोशिका बन जाती है तथा भ्रूणपोष के रूप में विकसित होने लगाती है। जबकि युग्मनज एक भ्रूण के रूप में विकसित होता है।
आवृतबीजी के अंतर्गत उन पौधों को रखा जाता है जिसके बीजों में आवरण पाया जाता है। इस समुदाय के पौधों को पुष्पीय पादप भी कहते हैं। क्योंकि इनमें पूर्ण विकसित पुष्प पाये जाते हैं।