Correct Answer:
Option D - डा. राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय ने गाँवों में प्रदूषण पर रोक हेतु मधुबनी से ‘सुखेत मॉडल’ को अपनाया है। इस मॉडल के तहत गाँव के किसानों से गोबर, खेत से निकलने वाला कचरा तथा घरेलू कचरा एकत्र किया जाता है। इसके बदले में ग्रामीणों को रसोई गैस के लिए पैसा दिया जाता है तथा एकत्रित कूड़े के निस्तारण के लिए वर्मी कम्पोस्ट बनाने का भी कार्य किया जाता है।
D. डा. राजेन्द्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय ने गाँवों में प्रदूषण पर रोक हेतु मधुबनी से ‘सुखेत मॉडल’ को अपनाया है। इस मॉडल के तहत गाँव के किसानों से गोबर, खेत से निकलने वाला कचरा तथा घरेलू कचरा एकत्र किया जाता है। इसके बदले में ग्रामीणों को रसोई गैस के लिए पैसा दिया जाता है तथा एकत्रित कूड़े के निस्तारण के लिए वर्मी कम्पोस्ट बनाने का भी कार्य किया जाता है।