Correct Answer:
Option B - 1575 तक अकबर सुन्नी धर्म के बाह्य रूपों को मानता रहा। उसने इस्लाम धर्म के दर्शन को समझने के उद्देश्य से शेख अब्दुल नबी तथा मखदूम-उल-मुल्क अबदुल्ला सुल्तानपुरी जैसे उलेमाओं की शिष्यता ग्रहण की। शिया मत के अनुयायी मुल्ला यजदी भी उसकी आध्यात्मिक पिपासा को शांत नहीं कर सके। अत: 1575 ई. में अकबर ने फतेहपुर सीकरी में एक इबादत खाना (पूजागृह) का निर्माण करवाया। इसमें प्रति बृहस्पतिवार को संध्या के समय नियमित रूप से धार्मिक विचार विमर्श हुआ करता था।
B. 1575 तक अकबर सुन्नी धर्म के बाह्य रूपों को मानता रहा। उसने इस्लाम धर्म के दर्शन को समझने के उद्देश्य से शेख अब्दुल नबी तथा मखदूम-उल-मुल्क अबदुल्ला सुल्तानपुरी जैसे उलेमाओं की शिष्यता ग्रहण की। शिया मत के अनुयायी मुल्ला यजदी भी उसकी आध्यात्मिक पिपासा को शांत नहीं कर सके। अत: 1575 ई. में अकबर ने फतेहपुर सीकरी में एक इबादत खाना (पूजागृह) का निर्माण करवाया। इसमें प्रति बृहस्पतिवार को संध्या के समय नियमित रूप से धार्मिक विचार विमर्श हुआ करता था।