एक कार्य जिसे 20 महिलाएं 16 दिनों में कर सकती है, उसे 16 पुरूषों द्वारा 15 दिनों में पूर्ण किया जाता है। एक पुरुष और एक महिला की क्षमता का अनुपात ज्ञात कीजिए।
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राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन की स्थापना कब हुई-
बुन्देलखण्ड आर्थिक क्षेत्र में जनपदों की संख्या है:
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-20 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढि़ए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए। ‘‘जापान एक छोटा द्वीप है। यह चीन से पूर्व में स्थित है। जापानी बड़े परिश्रमी होते हैं। ये लोग खूब साफ रहते हैं। उनका घर एक सुंदर फुलवारी-सा लगता है। ये अपने देश के लिए सब कुछ करने को तैयार रहते हैं। आज संसार जापानी मालों से भरा है। ये लोग सभी चीजें बनाते हैं। जापानी नवयुवक दूसरे देशों में जाकर पढ़ते हैं और अपने देश में कल-कारखाने खोलते हैं। वहाँ की जलवायु बहुुत ठण्डी नहीं है, इसलिए यह देश हरा-भरा रहता है। जापानी लोग भात और मछली खूब खाते हैं।’ जापानी का घर एक सुंदर फुलवारी-सा क्यों लगता है?
उत्तर प्रदेश में वूमेन पावर लाइन (डब्ल्यूपीएल) के लिए संपर्क नंबर क्या है?
निर्देश- प्रश्न संख्या (162 से 169) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां यथोचितं विकल्पं चित्वा उत्तराणि देयानि- ते तत्र विश्वासमापन्ना: तात! मातुल! भ्रात! इति ब्रुवाणा अहं पूर्वमहं पूर्वमिति समन्तात् परितस्थु:। सोऽपि दृष्टाशय: क्रमेण तान् पृष्ठे आरोप्य जलाशयस्य नातिदूरे शिलां समासाद्य तस्यामाक्षिप्य स्वेच्छया भक्षयित्वा भूयोऽपि जलाशयं समासाद्य जलचराणां मिथ्यावार्तासन्देशकैर्मनांसि रञ्जयन्नित्यामिवाहारवृत्तिमकरोत्। अन्यस्मिन् दिने च कुलीरकेणोक्त:- ‘‘माम! मया सह ते प्रथम: स्नेहसम्भाष: सञ्जात:। तत् किं मां परित्यज्य अन्यान्नयसि। तस्मादद्य मे प्राणत्राणं कुरु’’ तदाकरण्य सोऽपि दुष्टाशयश्चिन्तितवान् । ‘‘निर्विणोऽहं मत्स्यमांसादनेन। तदद्य एनं कुलीरकं व्यञ्जनस्थाने करोमि’’। इति विचिन्त्य तं पृष्ठे समारोप्य तां वध्यशिलामुद्दिश्य प्रस्थित:। कुलीरकोऽपि दूरादेवास्थिपर्वतं शिलाश्रयमवलोक्य मत्स्यास्थीनि परिज्ञाय तमपृच्छत् - ‘‘माम! कियद्दूरे स जलाशय:? मदीयभारेण अतिश्रान्तस्त्वं तत् कथय’’। सोऽपि मन्दधीर्जलचरोऽप्यमिति मत्वा स्थले न प्रभवतीति सस्मितमिदमाह- ‘‘कुलीरक!’’ कुतोऽन्यो जलाशय: मम प्राणयात्रेयम् , तस्मात् स्मय्र्यतामात्मनोऽभीष्टदेवता। त्वामपि अस्यां शिलायां निक्षिप्य भक्षयिष्यामि’’। इत्युक्तवति तस्मिन् स्ववदनदंशद्वयेन मृणालनालधवलायां मृदुग्रीवायां गृहीतो मृतश्च। अथ स तां बकग्रीवां समादाय शनै: शनै: तज्जलाशयमाससाद। तत: सर्वैरेव जलचरै: पृष्ट:- ‘‘भो: कुलीरक! किं निवृत्तस्त्वम्?’’ स मातुलोऽपि न आयात:? तत् किं चिरयति? वयं सर्वे सोत्सुका: कृतक्षणास्ति ष्ठाम:’’। एवं तैरभिहिते कुलीरकोऽपि विहस्योवाच- ‘‘मूर्खा: सर्वे जलचरास्तेन मिथ्यावादिना वञ्चयित्वा नातिदूरे शिलातले प्रक्षिप्य भक्षिता:। तन्मया आयु: शेषतया तस्य विश्वासघातकस्य अभिप्रायं ज्ञात्वा ग्रीवेयमानीता। तदलं सम्भ्रमेण। अधुना सर्वजलचराणां क्षेमं भविष्यति’’। अतोऽहंब्रवीमि- ‘‘भक्षयित्वा बहून् मत्स्यान्’’ इति।
सीखने-संबंधी निर्योग्यताएँ सामान्यत:
The magnitude of earthquake is measured through
Identify the test to be conducted for the determination of the modulus of subgrade reaction in pavement design.
Explanations:
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