Correct Answer:
Option D - ‘ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति। यहाँ तृणं में ‘तथायुक्तं चानीप्सितम्’ सूत्र से द्वितीया विभक्ति होती है।
तथायुक्तं चानीप्सितम् -ईप्सिततम कर्म की तरह ही जो अनीप्सित होते हुए भी कर्ता की क्रिया से युक्त है तो उस अनीप्सित कारक की भी कर्मसंज्ञा होती है।
यथा - ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति।
ओदनं भुञ्जानो विषं भुङ्क्ते।
D. ‘ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति। यहाँ तृणं में ‘तथायुक्तं चानीप्सितम्’ सूत्र से द्वितीया विभक्ति होती है।
तथायुक्तं चानीप्सितम् -ईप्सिततम कर्म की तरह ही जो अनीप्सित होते हुए भी कर्ता की क्रिया से युक्त है तो उस अनीप्सित कारक की भी कर्मसंज्ञा होती है।
यथा - ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति।
ओदनं भुञ्जानो विषं भुङ्क्ते।