Correct Answer:
Option B - संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत कानून निर्माण शक्तियों का त्रिस्तरीय विभाजन किया गया है।
संघ/केंद्र सूची (Union List)-
• इस सूची में मूलत: 97 प्रविष्टियाँ थीं, जो कि वर्तमान में 100 हैं।
• इसमें राष्ट्रीय महत्त्व के विषय शामिल हैं, जैसे- राष्ट्रीय सुरक्षा, सेनाएँ और सशस्त्र बल, युद्ध तथा शांति, विदेश संबंध, अंतर्राष्ट्रीय मंचों से संबंधित निर्णय, रेल तथा वायु परिवहन, मुद्रा निर्माण, बैंक, बीमा, विदेशी पर्यटन, डाक-तार तथा टेलीफोन, रिजर्व बैंक, नागरिकता से जुड़े विषय, तेल, खनिज तथा खानों का विनियमन, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के गठन से जुड़े विषय, केंद्रीय तथा अखिल भारतीय सेवाएँ, जनगणना से जुड़े विषय इत्यादि।
राज्य सूची (State List)-
• इस सूची में मूलत: 66 प्रविष्टियाँ थीं, जिनकी वर्तमान संख्या 61 है।
• इसमें क्षेत्रीय या स्थानीय महत्त्व के विषय शामिल हैं, जैसे- लोकव्यवस्था, पुलिस, स्थानीय शासन, कृषि, कृषि आय पर कर, लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, कारागार, मादक पेय पदार्थ का उत्पादन, सड़क परिवहन, भूमि और भवनों पर कर, नाट्यशाला, सिनेमा, खेल-कूद और मनोरंजन, होटल, बाजार, धर्मशालाएँ, विलासिता की वस्तुओं पर कर, पथकर आदि।
समवर्ती सूची (Concurrent List)-
• इसी सूची में मूलत: 47 विष्टियाँ थीं, परन्तु 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इस सूची में 5 और विषयों वन, शिक्षा, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, माप-तौल, न्यायालयों का कार्य-प्रबंध (न्याय प्रशासन; उच्च तथा उच्चतम न्यायालयों को छोड़कर), को शामिल किया गया है, जो वर्तमान में 52 हो गई हैं।
• इस सूची के कुछ प्रमुख विषय-
भ्रमण, आयोजन, आर्थिक और सामाजिक योजना, शिशु और अवस्यक, विवाह और विवाह-विच्छेद शिक्षा, सुरक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, समाचार पत्र, कारखाना, मूल्य नियंत्रण, दंड विधि, दंड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता आदि।
नोट- वे विषय जो उपर्युक्त तीनों सूचियों में सम्मिलित नहीं होते, वे अनुच्छेद 248 के अन्तर्गत अवशिष्ट सूची (Residual List) में आते हैं (भारत शासन अधिनियम 1935 में अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर जनरल के हाथों में सौंप दी गई थी) तथा इस सूची पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है। ऐसी शक्ति के अंतर्गत ऐसे कर के अधिरोपण के लिए जो उन सूचियों में से किसी में वर्णित नहीं है, विधि बनाने की शक्ति है। यह व्यवस्था कनाडा से ली गयी है जो भारतीय संविधान के एकात्मक स्वरूप को प्रदर्शित करती है।
B. संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत कानून निर्माण शक्तियों का त्रिस्तरीय विभाजन किया गया है।
संघ/केंद्र सूची (Union List)-
• इस सूची में मूलत: 97 प्रविष्टियाँ थीं, जो कि वर्तमान में 100 हैं।
• इसमें राष्ट्रीय महत्त्व के विषय शामिल हैं, जैसे- राष्ट्रीय सुरक्षा, सेनाएँ और सशस्त्र बल, युद्ध तथा शांति, विदेश संबंध, अंतर्राष्ट्रीय मंचों से संबंधित निर्णय, रेल तथा वायु परिवहन, मुद्रा निर्माण, बैंक, बीमा, विदेशी पर्यटन, डाक-तार तथा टेलीफोन, रिजर्व बैंक, नागरिकता से जुड़े विषय, तेल, खनिज तथा खानों का विनियमन, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के गठन से जुड़े विषय, केंद्रीय तथा अखिल भारतीय सेवाएँ, जनगणना से जुड़े विषय इत्यादि।
राज्य सूची (State List)-
• इस सूची में मूलत: 66 प्रविष्टियाँ थीं, जिनकी वर्तमान संख्या 61 है।
• इसमें क्षेत्रीय या स्थानीय महत्त्व के विषय शामिल हैं, जैसे- लोकव्यवस्था, पुलिस, स्थानीय शासन, कृषि, कृषि आय पर कर, लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, कारागार, मादक पेय पदार्थ का उत्पादन, सड़क परिवहन, भूमि और भवनों पर कर, नाट्यशाला, सिनेमा, खेल-कूद और मनोरंजन, होटल, बाजार, धर्मशालाएँ, विलासिता की वस्तुओं पर कर, पथकर आदि।
समवर्ती सूची (Concurrent List)-
• इसी सूची में मूलत: 47 विष्टियाँ थीं, परन्तु 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इस सूची में 5 और विषयों वन, शिक्षा, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, माप-तौल, न्यायालयों का कार्य-प्रबंध (न्याय प्रशासन; उच्च तथा उच्चतम न्यायालयों को छोड़कर), को शामिल किया गया है, जो वर्तमान में 52 हो गई हैं।
• इस सूची के कुछ प्रमुख विषय-
भ्रमण, आयोजन, आर्थिक और सामाजिक योजना, शिशु और अवस्यक, विवाह और विवाह-विच्छेद शिक्षा, सुरक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, समाचार पत्र, कारखाना, मूल्य नियंत्रण, दंड विधि, दंड प्रक्रिया संहिता, सिविल प्रक्रिया संहिता आदि।
नोट- वे विषय जो उपर्युक्त तीनों सूचियों में सम्मिलित नहीं होते, वे अनुच्छेद 248 के अन्तर्गत अवशिष्ट सूची (Residual List) में आते हैं (भारत शासन अधिनियम 1935 में अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर जनरल के हाथों में सौंप दी गई थी) तथा इस सूची पर कानून बनाने का अधिकार संसद को है। ऐसी शक्ति के अंतर्गत ऐसे कर के अधिरोपण के लिए जो उन सूचियों में से किसी में वर्णित नहीं है, विधि बनाने की शक्ति है। यह व्यवस्था कनाडा से ली गयी है जो भारतीय संविधान के एकात्मक स्वरूप को प्रदर्शित करती है।