Correct Answer:
Option C - हीनयान और महायान बौद्ध धर्म की शाखायें हैं। ‘चतुर्थ बौद्ध संगीति’ (कनिष्क के समय) के बाद बौद्ध धर्म दो भागों हीनयान एवं महायान में विभाजित हो गया। बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का आदर्श ‘बोधिसत्व’ है। बोधिसत्व दूसरे के कल्याण को प्राथमिकता देते हुये अपने निर्वाण में विलम्ब करते हैं।
हीनयान का आदर्श ‘अर्हत पद’ को प्राप्त करना है, जो व्यक्ति अपनी साधना से निर्वाण की प्राप्ति करते हैं, उन्हें ही ‘अर्हत’ कहा जाता है।
C. हीनयान और महायान बौद्ध धर्म की शाखायें हैं। ‘चतुर्थ बौद्ध संगीति’ (कनिष्क के समय) के बाद बौद्ध धर्म दो भागों हीनयान एवं महायान में विभाजित हो गया। बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का आदर्श ‘बोधिसत्व’ है। बोधिसत्व दूसरे के कल्याण को प्राथमिकता देते हुये अपने निर्वाण में विलम्ब करते हैं।
हीनयान का आदर्श ‘अर्हत पद’ को प्राप्त करना है, जो व्यक्ति अपनी साधना से निर्वाण की प्राप्ति करते हैं, उन्हें ही ‘अर्हत’ कहा जाता है।