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Q: ‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ इति नीते: कविरस्ति?
  • A. कालिदासेन
  • B. अश्वघोषेण
  • C. माघेन
  • D. भारविणा
Correct Answer: Option D - ‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ यह भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का है। इसे वनेचर कहता है तथा भारवि के द्वारा प्रणीत है।
D. ‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ यह भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का है। इसे वनेचर कहता है तथा भारवि के द्वारा प्रणीत है।

Explanations:

‘‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ यह भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग का है। इसे वनेचर कहता है तथा भारवि के द्वारा प्रणीत है।