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Q: हिंदी भाषा के मानकीकरण की दृष्टि से कौन सा युग सर्वाधिक महत्वपूर्ण युग था?
  • A. भारतेंदु युग
  • B. द्विवेदी युग
  • C. छायावादी युग
  • D. प्रगतिवादी युग
Correct Answer: Option B - हिन्दी भाषा के मानकीकरण की दृष्टि से द्विवेदी युग सर्वाधिक महत्वपूर्ण युग था। इसका श्रेय पूरी तरह से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं सरस्वती पत्रिका को है। द्विवेदी जी वर्तनी शुद्धता, उचित शब्दों, विराम चिह्नो के प्रयोग इत्यादि पर विशेष जोर दिया। भारतेन्दु युग को नवजागरण का युग माना जाता है। यह गद्य के विकास का काल माना जाता है, प्राय: सभी आधुनिक गद्य विधाओं का विकास इसी काल में हुआ। हिन्दी कविता में मुक्तक छन्द का प्रवेश छायावाद की प्रमुख देन है। परम्परा से हटकर नये भावबोधों का प्रकाशन प्रगतिवाद की प्रमुख उपलब्धि है। इस पर माक्र्सवादी दर्शन का प्रभाव है।
B. हिन्दी भाषा के मानकीकरण की दृष्टि से द्विवेदी युग सर्वाधिक महत्वपूर्ण युग था। इसका श्रेय पूरी तरह से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं सरस्वती पत्रिका को है। द्विवेदी जी वर्तनी शुद्धता, उचित शब्दों, विराम चिह्नो के प्रयोग इत्यादि पर विशेष जोर दिया। भारतेन्दु युग को नवजागरण का युग माना जाता है। यह गद्य के विकास का काल माना जाता है, प्राय: सभी आधुनिक गद्य विधाओं का विकास इसी काल में हुआ। हिन्दी कविता में मुक्तक छन्द का प्रवेश छायावाद की प्रमुख देन है। परम्परा से हटकर नये भावबोधों का प्रकाशन प्रगतिवाद की प्रमुख उपलब्धि है। इस पर माक्र्सवादी दर्शन का प्रभाव है।

Explanations:

हिन्दी भाषा के मानकीकरण की दृष्टि से द्विवेदी युग सर्वाधिक महत्वपूर्ण युग था। इसका श्रेय पूरी तरह से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं सरस्वती पत्रिका को है। द्विवेदी जी वर्तनी शुद्धता, उचित शब्दों, विराम चिह्नो के प्रयोग इत्यादि पर विशेष जोर दिया। भारतेन्दु युग को नवजागरण का युग माना जाता है। यह गद्य के विकास का काल माना जाता है, प्राय: सभी आधुनिक गद्य विधाओं का विकास इसी काल में हुआ। हिन्दी कविता में मुक्तक छन्द का प्रवेश छायावाद की प्रमुख देन है। परम्परा से हटकर नये भावबोधों का प्रकाशन प्रगतिवाद की प्रमुख उपलब्धि है। इस पर माक्र्सवादी दर्शन का प्रभाव है।