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Q: In a eukaryotic cell, which phase of the cell cycle is called the 'distance phase' where chromosomes reach opposite poles and unwind into thin strands of DNA, spindle fibres disappear and the nuclear membrane reapears? एक यूकेरियोटिक कोशिका में कोशिका चक्र की किस प्रावस्था को दूरी प्रावस्था कहा जाता है, जिसमें गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं और डीएनए (DNA) के पतले तंतुओं में खुल जाते हैं, तर्कु तंतु गायब हो जाते हैं और केन्द्रक झिल्ली फिर से प्रकट हो जाती है?
  • A. Prophase/पूर्वावस्था
  • B. Anaphase/पश्चावस्था
  • C. Telophase/अंत्यावस्था
  • D. Prometaphase/प्रमध्यावस्था
Correct Answer: Option C - टेलोफेज (Telophase)- इस अवस्था में संतति गुणसूत्र विपरीत दिशा में खिसकते-खिसकते अपनी ओर के तारककाय के निकट पहुँच जाते हैं। अब प्रत्येक कोशिका ध्रुव (Pole) में मौजूद संतति गुणसूत्रों में प्रोफेज के ठीक विपरीत प्रतिक्रियाएँ होती हैं। इसके फलस्वरूप गुणसूत्रों में जलीयकरण (Hydration) शुरू हो जाता है जिससे गुणसूत्र धीरे-धीरे पतले व लम्बे हो जाते हैं और वे स्पष्ट दिखाई नहीं पड़ते हैं। केन्द्रिका पुन: प्रकट हो जाती है। इसके साथ-साथ गुणसूत्रों के चारों ओर केन्द्रक झिल्ली का निर्माण फिर से हो जाता है। इस प्रकार एक मातृ केन्द्रक से दो संतति केन्द्रक बन जाते हैं।
C. टेलोफेज (Telophase)- इस अवस्था में संतति गुणसूत्र विपरीत दिशा में खिसकते-खिसकते अपनी ओर के तारककाय के निकट पहुँच जाते हैं। अब प्रत्येक कोशिका ध्रुव (Pole) में मौजूद संतति गुणसूत्रों में प्रोफेज के ठीक विपरीत प्रतिक्रियाएँ होती हैं। इसके फलस्वरूप गुणसूत्रों में जलीयकरण (Hydration) शुरू हो जाता है जिससे गुणसूत्र धीरे-धीरे पतले व लम्बे हो जाते हैं और वे स्पष्ट दिखाई नहीं पड़ते हैं। केन्द्रिका पुन: प्रकट हो जाती है। इसके साथ-साथ गुणसूत्रों के चारों ओर केन्द्रक झिल्ली का निर्माण फिर से हो जाता है। इस प्रकार एक मातृ केन्द्रक से दो संतति केन्द्रक बन जाते हैं।

Explanations:

टेलोफेज (Telophase)- इस अवस्था में संतति गुणसूत्र विपरीत दिशा में खिसकते-खिसकते अपनी ओर के तारककाय के निकट पहुँच जाते हैं। अब प्रत्येक कोशिका ध्रुव (Pole) में मौजूद संतति गुणसूत्रों में प्रोफेज के ठीक विपरीत प्रतिक्रियाएँ होती हैं। इसके फलस्वरूप गुणसूत्रों में जलीयकरण (Hydration) शुरू हो जाता है जिससे गुणसूत्र धीरे-धीरे पतले व लम्बे हो जाते हैं और वे स्पष्ट दिखाई नहीं पड़ते हैं। केन्द्रिका पुन: प्रकट हो जाती है। इसके साथ-साथ गुणसूत्रों के चारों ओर केन्द्रक झिल्ली का निर्माण फिर से हो जाता है। इस प्रकार एक मातृ केन्द्रक से दो संतति केन्द्रक बन जाते हैं।