Explanations:
क्लीट वायरिंग में क्लीट्स नियमित अन्तराल पर लगाये जाने चाहिए जिन्हें 0.6 मीटर से अधिक पर नही होना चाहिए। क्लीट वायरिंग– ■ यह तार स्थापन प्रणाली अस्थायी प्रकार की है तथा नमी वाले स्थानों व दर्शनीय स्थानों के लिए उपयुक्त नहीं है। ■ तार स्थापन आधार के रूप में पोर्सिलेन के दो मार्गी या तीन मार्गी क्लीट उपयोग में लाये जाते है जिन्हें लकड़ी की गुल्लियों में स्थापित किया जाता है। ■ क्लीट की परस्पर दूरी सामान्यत: 30 सेमी रखी जाती है तथा किसी भी स्थिति में ये 60 सेमी से अधिक दूरी पर नहीं होती है। ■ इस तार स्थापन में PVC या VIR प्रकार की केबिल उपयोग मे लायी जाती है। ■ तार स्थापन की यह प्रणाली सबसे सरल तथा सस्ती है।