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Q: ......... is the process of uterine, cervical and other changes that brings on labor. _____ गर्भाशय ग्रीवा और अन्य परिवर्तनों की प्रक्रिया है जो प्रसव पीड़ा लाती है। I. Operation I. संचालन II. Parturition II. प्रसव
  • A. Both I and II/I तथा II दोनों
  • B. Only II/केवल II
  • C. Only I/केवल I
  • D. Neither I nor II /ना ही I ना ही II
Correct Answer: Option B - गर्भकाल पूरा होने पर पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भ से बाहर आना, प्रसव (पारट्यूरिशन) कहलाता है। इस दौरान गर्भाशयी तथा उदरीय संकुचन होते हैं व गर्भाशय फैल जाता है। जिससे गर्भस्थ शिशु बाहर आ जाता है। प्रसव का प्रेरण ऑक्सीटोसिन, एस्ट्रोजेन व कॉर्टिकल नामक हॉर्मोन करते है। प्रसव एक जटिल तंत्रि-अंत:स्त्रावी क्रियाविधि द्वारा प्रेरित होता है। प्रसव के लिए संकेत पूर्ण विकसित गर्भ एवं अपरा से उत्पन्न होते हैं, जो गर्भाशय में हल्के संकुचन को प्रेरित करते हैं। जिन्हें गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त कहते हैं। यह मातृ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसिन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है।
B. गर्भकाल पूरा होने पर पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भ से बाहर आना, प्रसव (पारट्यूरिशन) कहलाता है। इस दौरान गर्भाशयी तथा उदरीय संकुचन होते हैं व गर्भाशय फैल जाता है। जिससे गर्भस्थ शिशु बाहर आ जाता है। प्रसव का प्रेरण ऑक्सीटोसिन, एस्ट्रोजेन व कॉर्टिकल नामक हॉर्मोन करते है। प्रसव एक जटिल तंत्रि-अंत:स्त्रावी क्रियाविधि द्वारा प्रेरित होता है। प्रसव के लिए संकेत पूर्ण विकसित गर्भ एवं अपरा से उत्पन्न होते हैं, जो गर्भाशय में हल्के संकुचन को प्रेरित करते हैं। जिन्हें गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त कहते हैं। यह मातृ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसिन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है।

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गर्भकाल पूरा होने पर पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भ से बाहर आना, प्रसव (पारट्यूरिशन) कहलाता है। इस दौरान गर्भाशयी तथा उदरीय संकुचन होते हैं व गर्भाशय फैल जाता है। जिससे गर्भस्थ शिशु बाहर आ जाता है। प्रसव का प्रेरण ऑक्सीटोसिन, एस्ट्रोजेन व कॉर्टिकल नामक हॉर्मोन करते है। प्रसव एक जटिल तंत्रि-अंत:स्त्रावी क्रियाविधि द्वारा प्रेरित होता है। प्रसव के लिए संकेत पूर्ण विकसित गर्भ एवं अपरा से उत्पन्न होते हैं, जो गर्भाशय में हल्के संकुचन को प्रेरित करते हैं। जिन्हें गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त कहते हैं। यह मातृ पीयूष ग्रंथि से ऑक्सीटोसिन गर्भाशय पेशी पर क्रिया करता है और इसके कारण गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रारम्भ हो जाता है।