Correct Answer:
Option A - कोह्लबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धान्त ने संज्ञानात्मक परिपक्वता और नैतिक परिपक्वता के बीच एक सहयोग का समर्थन किया है अर्थात् नैतिक विकास के तीनों स्तर तथा सातों सोपान क्रमश: नैतिक निर्णय लेने की बढ़ती योग्यता तथा दृष्टिकोणों की बढ़ती व्यापकता व अमूर्तता को इंगित करते हैं। जैसे- प्रथम स्तर (पूर्व-परम्परागत स्तर) पर बालक आत्म केन्द्रित होते हैं क्योंकि वे स्वयं के हित की दृष्टि ही नैतिक व्यवहार करते हैं जबकि तृतीय स्तर (उत्तर परम्परागत स्तर) पर बालक बाह्य केन्द्रित हो जाते हैं तथा वे निष्पक्ष भाव से नैतिक व्यवहार करते हैं।
A. कोह्लबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धान्त ने संज्ञानात्मक परिपक्वता और नैतिक परिपक्वता के बीच एक सहयोग का समर्थन किया है अर्थात् नैतिक विकास के तीनों स्तर तथा सातों सोपान क्रमश: नैतिक निर्णय लेने की बढ़ती योग्यता तथा दृष्टिकोणों की बढ़ती व्यापकता व अमूर्तता को इंगित करते हैं। जैसे- प्रथम स्तर (पूर्व-परम्परागत स्तर) पर बालक आत्म केन्द्रित होते हैं क्योंकि वे स्वयं के हित की दृष्टि ही नैतिक व्यवहार करते हैं जबकि तृतीय स्तर (उत्तर परम्परागत स्तर) पर बालक बाह्य केन्द्रित हो जाते हैं तथा वे निष्पक्ष भाव से नैतिक व्यवहार करते हैं।