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Q: ‘कुमार! यह मृत्यु और निर्वासन का सुख, यह तुम अकेले ही लोगे यह नहीं हो सकता’–किस नाटक की पंक्ति है?
  • A. जनमेजय का नागयज्ञ
  • B. एक घूँट
  • C. कामना
  • D. ध्रुवस्वामिनी
Correct Answer: Option D - ‘कुमार! यह मृत्यु और निर्वासन का सुख यह तुम अकेले ही लोगे यह नहीं हो सकता’– यह पंक्ति जयशंकर प्रसाद कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की है। यह नाटक विशाख के देवी चन्द्रगुप्त के आधार पर लिखा गया है। ध्रुवस्वामिनी नाटक से समस्या नाटक का प्रवर्तन माना जाता है। इसमें अनमेल विवाह, तलाक एवं पुनर्विवाह की समस्या को उठाया गया है। जनमेयज का नागयज्ञ, एक घूँट, कामना आदि जयशंकर प्रसाद के अन्य प्रमुख नाटक हैं। जयशंकर प्रसाद ऐतिहासिक नाटककार के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
D. ‘कुमार! यह मृत्यु और निर्वासन का सुख यह तुम अकेले ही लोगे यह नहीं हो सकता’– यह पंक्ति जयशंकर प्रसाद कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की है। यह नाटक विशाख के देवी चन्द्रगुप्त के आधार पर लिखा गया है। ध्रुवस्वामिनी नाटक से समस्या नाटक का प्रवर्तन माना जाता है। इसमें अनमेल विवाह, तलाक एवं पुनर्विवाह की समस्या को उठाया गया है। जनमेयज का नागयज्ञ, एक घूँट, कामना आदि जयशंकर प्रसाद के अन्य प्रमुख नाटक हैं। जयशंकर प्रसाद ऐतिहासिक नाटककार के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

Explanations:

‘कुमार! यह मृत्यु और निर्वासन का सुख यह तुम अकेले ही लोगे यह नहीं हो सकता’– यह पंक्ति जयशंकर प्रसाद कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की है। यह नाटक विशाख के देवी चन्द्रगुप्त के आधार पर लिखा गया है। ध्रुवस्वामिनी नाटक से समस्या नाटक का प्रवर्तन माना जाता है। इसमें अनमेल विवाह, तलाक एवं पुनर्विवाह की समस्या को उठाया गया है। जनमेयज का नागयज्ञ, एक घूँट, कामना आदि जयशंकर प्रसाद के अन्य प्रमुख नाटक हैं। जयशंकर प्रसाद ऐतिहासिक नाटककार के रूप में प्रतिष्ठित हैं।