Explanations:
किरातार्जुनीयम् नामक महाकाव्य की रचना महाकवि भारवि ने की है। यह वृहत्त्रयी का प्रथम अनमोल रत्न है। इसमें कुल 18 सर्ग हैं। इसके प्रत्येक सर्ग का प्रारम्भ श्री शब्द से और अंत `लक्ष्मी' शब्द से होता है। वस्तुत: भारवि रीति शैली के जन्मदाता हैं।