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Q: किस युग को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है?
  • A. मौर्य साम्राज्य, तीसरी शताब्दी
  • B. चोल साम्राज्य, तीसरी शताब्दी
  • C. गुप्त साम्राज्य, चौथी शताब्दी
  • D. कुषाण साम्राज्य, पहली शताब्दी
Correct Answer: Option C - गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इसे भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार, धार्मिक सहिष्णुता, आर्थिक समृद्धि तथा शासन व्यवस्था की स्थापना काल के रूप में जाना जाता है। • मूर्तिकला के क्षेत्र में देखें तो गुप्तकाल में भरहुत अमरावती, सांची तथा मथुरा इस काल की प्रसिद्ध मूर्तियों के निर्माण का काल था। • चित्रकारी के क्षेत्र में अजन्ता, एलोरा तथा बाघ की गुफाओं में की गई चित्रकारी है। • विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में आर्यभट्ट जहाँ पृथ्वी की त्रिज्या की गणना की और सूर्य-केन्द्रित ब्रहाण्ड का सिद्धान्त दिया वही दूसरी ओर वराहमिहिर ने चन्द्र कैलेण्डर की शुरुआत की।
C. गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इसे भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार, धार्मिक सहिष्णुता, आर्थिक समृद्धि तथा शासन व्यवस्था की स्थापना काल के रूप में जाना जाता है। • मूर्तिकला के क्षेत्र में देखें तो गुप्तकाल में भरहुत अमरावती, सांची तथा मथुरा इस काल की प्रसिद्ध मूर्तियों के निर्माण का काल था। • चित्रकारी के क्षेत्र में अजन्ता, एलोरा तथा बाघ की गुफाओं में की गई चित्रकारी है। • विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में आर्यभट्ट जहाँ पृथ्वी की त्रिज्या की गणना की और सूर्य-केन्द्रित ब्रहाण्ड का सिद्धान्त दिया वही दूसरी ओर वराहमिहिर ने चन्द्र कैलेण्डर की शुरुआत की।

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गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इसे भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार, धार्मिक सहिष्णुता, आर्थिक समृद्धि तथा शासन व्यवस्था की स्थापना काल के रूप में जाना जाता है। • मूर्तिकला के क्षेत्र में देखें तो गुप्तकाल में भरहुत अमरावती, सांची तथा मथुरा इस काल की प्रसिद्ध मूर्तियों के निर्माण का काल था। • चित्रकारी के क्षेत्र में अजन्ता, एलोरा तथा बाघ की गुफाओं में की गई चित्रकारी है। • विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में आर्यभट्ट जहाँ पृथ्वी की त्रिज्या की गणना की और सूर्य-केन्द्रित ब्रहाण्ड का सिद्धान्त दिया वही दूसरी ओर वराहमिहिर ने चन्द्र कैलेण्डर की शुरुआत की।