search
Next arrow-right
Q: कत्यूरियों की दरबारी भाषा थी-
  • A. कुमाऊँनी
  • B. गढ़वाली
  • C. संस्कृत
  • D. प्राकृत
Correct Answer: Option C - मध्यकालीन कुमाऊँ क्षेत्र के कत्यूरी शासन की जानकारी हमें मौखिक रूप से प्रचलित स्थानीय लोकगाथाओं से मिलती है, लोकगाथाओं के अनुसार कार्तिकेयपुर राजाओं के पश्चात् कुमाऊँ में कत्यूरियों का शासन स्थापित हुआ। कत्यूरियों की दरबारी भाषा संस्कृत थी। उन्होंने अपने राज्य को कूर्माचल कहा। कूर्म भगवान विष्णु का दूसरा अवतार था, जिससे इसका नाम कुमाऊं पड़ा। कत्यूरी वंश के संस्थापक वसंतदेव थे।
C. मध्यकालीन कुमाऊँ क्षेत्र के कत्यूरी शासन की जानकारी हमें मौखिक रूप से प्रचलित स्थानीय लोकगाथाओं से मिलती है, लोकगाथाओं के अनुसार कार्तिकेयपुर राजाओं के पश्चात् कुमाऊँ में कत्यूरियों का शासन स्थापित हुआ। कत्यूरियों की दरबारी भाषा संस्कृत थी। उन्होंने अपने राज्य को कूर्माचल कहा। कूर्म भगवान विष्णु का दूसरा अवतार था, जिससे इसका नाम कुमाऊं पड़ा। कत्यूरी वंश के संस्थापक वसंतदेव थे।

Explanations:

मध्यकालीन कुमाऊँ क्षेत्र के कत्यूरी शासन की जानकारी हमें मौखिक रूप से प्रचलित स्थानीय लोकगाथाओं से मिलती है, लोकगाथाओं के अनुसार कार्तिकेयपुर राजाओं के पश्चात् कुमाऊँ में कत्यूरियों का शासन स्थापित हुआ। कत्यूरियों की दरबारी भाषा संस्कृत थी। उन्होंने अपने राज्य को कूर्माचल कहा। कूर्म भगवान विष्णु का दूसरा अवतार था, जिससे इसका नाम कुमाऊं पड़ा। कत्यूरी वंश के संस्थापक वसंतदेव थे।