Correct Answer:
Option B - ‘कवित कह्यो दोहा कह्यो, तुलै न छप्पय छंद।
बिरच्यो यहै बिचारि कै, यह बखै रस कंद।।’ यह काव्य पंक्ति रहीम की है। रहीम की रचनाएँ हैं– 1. रहीम सतसई 2. शृंगार सोरठा 3. मदनाष्टक 4. रास पंचाध्यायी 5. बरवै नायिका भेद 6. रहीम रत्नावली।
B. ‘कवित कह्यो दोहा कह्यो, तुलै न छप्पय छंद।
बिरच्यो यहै बिचारि कै, यह बखै रस कंद।।’ यह काव्य पंक्ति रहीम की है। रहीम की रचनाएँ हैं– 1. रहीम सतसई 2. शृंगार सोरठा 3. मदनाष्टक 4. रास पंचाध्यायी 5. बरवै नायिका भेद 6. रहीम रत्नावली।