Correct Answer:
Option A - ‘काव्येषु नाटकं रम्यं’– यह कथन कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के संदर्भ में है। यह कालिदास का सर्वश्रेष्ठ नाटक है। इसमें सात अंकों में दुष्यंत तथा शकुन्तला के मिलन वियोग तथा पुनर्मिलन का वर्णन है।
कालिदास की 7 रचनाएँ प्रसिद्ध हैं–
1. ऋतुसंहार – (6 सर्ग) – (गीतिकाव्य)
2. मेघदूतम् – (गीतिकाव्य)
3. कुमारसंभवम् – (17 सर्ग) – (महाकाव्य)–(शृंगार रस प्रधान)
4. रघुवंशम् – (19 सर्ग) – (महाकाव्य)
5. मालविकाग्निमित्रम् – (5 अंक) (नाटक)
6. विक्रमोर्वशीयम् – (5 अंक) (नाटक)
7. अभिज्ञानशाकुन्तलम् – (7 अंक) (नाटक)
A. ‘काव्येषु नाटकं रम्यं’– यह कथन कालिदास के नाटक ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ के संदर्भ में है। यह कालिदास का सर्वश्रेष्ठ नाटक है। इसमें सात अंकों में दुष्यंत तथा शकुन्तला के मिलन वियोग तथा पुनर्मिलन का वर्णन है।
कालिदास की 7 रचनाएँ प्रसिद्ध हैं–
1. ऋतुसंहार – (6 सर्ग) – (गीतिकाव्य)
2. मेघदूतम् – (गीतिकाव्य)
3. कुमारसंभवम् – (17 सर्ग) – (महाकाव्य)–(शृंगार रस प्रधान)
4. रघुवंशम् – (19 सर्ग) – (महाकाव्य)
5. मालविकाग्निमित्रम् – (5 अंक) (नाटक)
6. विक्रमोर्वशीयम् – (5 अंक) (नाटक)
7. अभिज्ञानशाकुन्तलम् – (7 अंक) (नाटक)