Explanations:
प्रारंभ में अकबर ने शेरशाह द्वारा अपनाई गयी जाब्ती प्रणाली को अपनाया जिसमें पैमाइश के आधार पर भूमि उत्पादन का 1/3 भाग कर के रूप में लिया जाता था। अर्थात जाब्ती एक प्रकार से जमीन की पैमाइश था। जाब्ती प्रणाली के अत्यन्त महंगी एवं दोषपूर्ण होने के कारण 1568 ई. में शिहाबुद्दीन अहमद के सिफारिश पर इसे समाप्त कर इसके स्थान पर नस्क अथवा कनकूल व्यवस्था को शुरू किया गया।