Explanations:
अशोक द्वारा निर्मित सारनाथ सिंहचतुर्मुख धर्मचक्र प्रवर्तन की घटना का स्मारक है, जिसकी स्थापना धर्मसंघ की अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए हुई थी। यह चुनार के बलुआ पत्थर के लगभग 45 फुट लम्बे प्रस्तर खण्ड का बना हुआ है। धरती में गड़े हुए आधार को छोड़कर इसका दण्ड गोलाकार है, जो ऊपर की ओर क्रमश: पतला होता जाता है।