Explanations:
नलचम्पू में श्लेष अलज्रर बहुलतापूर्वक प्रयुक्त हुआ है। त्रिविक्रम भट्ट अपनी श्लेष प्रधान रचना के लिए प्रसिद्ध है। इनकी रचना में प्रसाद और माधुर्य गुण पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। श्लेष अलङ्कार का एक उदाहरण दृष्टव्य है- ‘‘कृतगोवर्धनोद्धारं हेलोन्मूलितमेरुणा। उपेन्द्रमिन्द्रराजेन जित्वा येन न विस्मितम् ।।’’