Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: आज किसी भी व्यक्ति का सबसे अलग एक टापू की तरह जीना संभव नहीं रह गया है। भारत में विभिन्न पंथों और विविध मत-मतांतरों के लोग साथ-साथ रह रहे हैं। ऐसे मेें यह अधिक जरूरी हो गया है कि लोग एक-दूसरे को जानें; उनकी जरूरतों को, उनकी इच्छाओं-आकांक्षाओं को समझें उन्हें तरजीह दें और उनके धार्मिक विश्वासों, पद्धतियों, अनुष्ठानों को सम्मान दें। भारत जैसे देश में यह और भी अधिक जरूरी है, क्योंकि यह देश किसी एक धर्म, मत या विचारधारा का नहीं है। स्वामी विवेकानंद इस बात को समझते थे और अपने आचार-विचार में अपने समय से बहुत आगे थे। उनका दृढ़ मत था कि विभिन्न धर्मों-संप्रदायों के बीच संवाद होना ही चाहिए। वे विभिन्न धर्मों- संप्रदायों की अनेकरूपता को जायज और स्वाभाविक मानते थे। स्वामी जी विभिन्न धार्मिक आस्थाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने के पक्षधर थे और सभी को एक ही धर्म का अनुयायी बनाने के विरुद्ध थे। वे कहा करते थे, ‘‘यदि सभी मानव एक ही धर्म को मानने लगें, एक ही पूजा-पद्धति को अपना लें और एक-सी नैतिकता का अनुपालन करने लगें, तो यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात होगी, क्योंकि यह सब हमारे धार्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए प्राणघातक होगा तथा हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों से काट देगा’’। हमें सभी धर्म-संप्रदाय-पंथ-विचारों के लोगों को और उनकी विचारधाराओं और उपासना पद्धतियों को उचित सम्मान देना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को चाहे वह किसी जाति-धर्म और भाषा से सम्बन्धित है, प्रकृति ने समान बनाया है। सभी मनुष्यों में एक ही परमात्मा का वास है। जागतिक विकास की दृष्टि से कोई पिछड़ा हो सकता है। यदि कोई पिछड़ा हुआ है तो उसे अपने साथ ले लेने से मानवता खिल उठती है। मानवता कब खिल उठती है?
A.
जब पिछड़ों को सहारा दिया जाता है।
B.
जब एकाधिक धर्मों को मानने वाले साथ रहते हैं।
C.
जब सभी में स्थित एक परमात्मा को ही एकमात्र सत्य स्वीकार किया जाता है।
D.
जब सभी का आध्यात्मिक विकास होगा।
Correct Answer:
Option A - गद्यांश के अनुसार, जब पिछड़ों को सहारा दिया जाता है तब मानवता खिल उठती है।
A. गद्यांश के अनुसार, जब पिछड़ों को सहारा दिया जाता है तब मानवता खिल उठती है।
Explanations:
गद्यांश के अनुसार, जब पिछड़ों को सहारा दिया जाता है तब मानवता खिल उठती है।
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