Explanations:
‘शारंगधर’ चौरासी सिद्धों में नहीं आते। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने शारंगधर को ‘हम्मीरासोे’ ग्रंथ का रचयिता माना है। विरूपा, कण्हपा और कुक्कुरिपा 84 सिद्धों में आते हैं। सिद्धों में सबसे पुराने ‘सरहपा’ माने जाते हैं। इनकी भाषा ‘संध्या भाषा’ कहलाती है।