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Q: निम्नलिखित में से कौन-से कथन की सहमति गणित के संरचनात्मक (रचनावादी दृष्टिकोण) से की जा सकती है?
  • A. गणित पूर्णतया विषयपरक है।
  • B. मानसदर्शन गणित का महत्त्वपूर्ण पहलू है।
  • C. गणित तथ्यों को सीखने के बारे में है।
  • D. गणितज्ञों से सच्चाई का आविष्कार अपेक्षित होना चाहिए।
Correct Answer: Option B - मानसदर्शन गणित का महत्त्वपूर्ण पहलू है।’’ यह कथन गणित के संरचनात्मक (रचनावादी दृष्टिकोण) से पूर्णत: सत्य है। सन् 1920 के लगभग पियाजे ने यह समझ बनाई कि बच्चों द्वारा की गयी गलतियाँ हमें यह बताती हैं कि वे कैसे सोचते हैं और ये गलतियां उनकी गणितीय सोच में झांकने का एक उम्दा झरोखा है। सीखने का यह नजरिया जो सीखने वाले को सीखने की प्रक्रिया में एक सक्रियकर्ता मानता है रचनावादी मॉडल कहलाता है।
B. मानसदर्शन गणित का महत्त्वपूर्ण पहलू है।’’ यह कथन गणित के संरचनात्मक (रचनावादी दृष्टिकोण) से पूर्णत: सत्य है। सन् 1920 के लगभग पियाजे ने यह समझ बनाई कि बच्चों द्वारा की गयी गलतियाँ हमें यह बताती हैं कि वे कैसे सोचते हैं और ये गलतियां उनकी गणितीय सोच में झांकने का एक उम्दा झरोखा है। सीखने का यह नजरिया जो सीखने वाले को सीखने की प्रक्रिया में एक सक्रियकर्ता मानता है रचनावादी मॉडल कहलाता है।

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मानसदर्शन गणित का महत्त्वपूर्ण पहलू है।’’ यह कथन गणित के संरचनात्मक (रचनावादी दृष्टिकोण) से पूर्णत: सत्य है। सन् 1920 के लगभग पियाजे ने यह समझ बनाई कि बच्चों द्वारा की गयी गलतियाँ हमें यह बताती हैं कि वे कैसे सोचते हैं और ये गलतियां उनकी गणितीय सोच में झांकने का एक उम्दा झरोखा है। सीखने का यह नजरिया जो सीखने वाले को सीखने की प्रक्रिया में एक सक्रियकर्ता मानता है रचनावादी मॉडल कहलाता है।