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Q: निम्नलिखित वाक्यों A तथा B को पढ़े तथा सही विकल्प चुनें। A. पाठ्यचर्या में जेंडर परिप्रेक्ष्य को शामिल करना महिलाओं के संदर्भों/प्रतिनिधित्व में बढ़ोत्तरी मात्र से है। B. पाठ्यचर्या में जेंडर परिप्रेक्ष्य को शामिल करने के लिए मुद्दों की चर्चा में स्त्री परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
  • A. केवल A सही है।
  • B. केवल B सही है।
  • C. दोनों A तथा B सही हैं।
  • D. न तो A सही है और न ही B
Correct Answer: Option B - पाठ्यचर्या में जेंडर परिप्रेक्ष्य को शामिल करने के लिए मुद्दों की चर्चा में स्त्री परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें समाजिक गठन के रूप में जेंडर की स्पष्ट समझ विकसित करने और इसे सुगम बनाने के साधन के रूप में अध्यापकों तथा प्रधानाध्यापकों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है जो जेंडर न्यायोचित निष्पक्ष समाज की दिशा में सकारात्मक हस्तक्षेप कर सकते हैं। लैंगिग भेदभाव की प्रवृत्ति भारत में प्राचीन काल से ही हो रही है जो काफी सुधार के बाद भी आधुनिक समय में अपना अस्तित्व बनाए हुए है। पितृप्रधान समाज होने के कारण पुरूषवादी मानसिकता आज भी व्याप्त है।
B. पाठ्यचर्या में जेंडर परिप्रेक्ष्य को शामिल करने के लिए मुद्दों की चर्चा में स्त्री परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें समाजिक गठन के रूप में जेंडर की स्पष्ट समझ विकसित करने और इसे सुगम बनाने के साधन के रूप में अध्यापकों तथा प्रधानाध्यापकों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है जो जेंडर न्यायोचित निष्पक्ष समाज की दिशा में सकारात्मक हस्तक्षेप कर सकते हैं। लैंगिग भेदभाव की प्रवृत्ति भारत में प्राचीन काल से ही हो रही है जो काफी सुधार के बाद भी आधुनिक समय में अपना अस्तित्व बनाए हुए है। पितृप्रधान समाज होने के कारण पुरूषवादी मानसिकता आज भी व्याप्त है।

Explanations:

पाठ्यचर्या में जेंडर परिप्रेक्ष्य को शामिल करने के लिए मुद्दों की चर्चा में स्त्री परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें समाजिक गठन के रूप में जेंडर की स्पष्ट समझ विकसित करने और इसे सुगम बनाने के साधन के रूप में अध्यापकों तथा प्रधानाध्यापकों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है जो जेंडर न्यायोचित निष्पक्ष समाज की दिशा में सकारात्मक हस्तक्षेप कर सकते हैं। लैंगिग भेदभाव की प्रवृत्ति भारत में प्राचीन काल से ही हो रही है जो काफी सुधार के बाद भी आधुनिक समय में अपना अस्तित्व बनाए हुए है। पितृप्रधान समाज होने के कारण पुरूषवादी मानसिकता आज भी व्याप्त है।