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Q: निम्नलिखितानि पद्यानि पठित्वा षट् (100-105) प्रश्नानाम् उत्तराणि यथोचितं विकल्पं चित्वा देयानि- खल: सर्षपमात्राणि परच्छिद्राणि पश्यति। आत्मनो बिल्वमात्राणि पश्यन्नपि न पश्यति।। 1।। सर्पदुर्जनयोर्मध्ये वरं सर्पों न दुर्जन:। सर्पो दशति कालेन दुर्जनस्तु पदे पदे।। 2 ।। चन्दनं शीतलं लोके चन्दनादपि चन्द्रमा:। चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसङ्गति:।। 3।। वृथा वृष्टि: समुद्रेषु वृथा तृप्तस्य भोजनम्। वृथा दानं समर्थस्य वृथा दीपो दिवापि च ।। 4 ।। शरदि न वर्षति गर्जति, वर्षति वर्षासु नि:स्वनो मेघ:। नीचो वदति न कुरूते, न वदति सुजन: करोत्येव।। 5।।खल: आत्मन: कीदृशानि छिद्राणि न पश्यति?
  • A. अदृष्टानि
  • B. सर्षपमात्राणि
  • C. बिल्वमात्राणि
  • D. नारिकेलमात्राणि
Correct Answer: Option C - खल: आत्मन: विल्वमात्राणि छिद्राणि न पश्यति। अर्थात् दुर्जन अपने आपके वेल के मात्र बराबर छिद्रों को नहीं देखता है।
C. खल: आत्मन: विल्वमात्राणि छिद्राणि न पश्यति। अर्थात् दुर्जन अपने आपके वेल के मात्र बराबर छिद्रों को नहीं देखता है।

Explanations:

खल: आत्मन: विल्वमात्राणि छिद्राणि न पश्यति। अर्थात् दुर्जन अपने आपके वेल के मात्र बराबर छिद्रों को नहीं देखता है।