निर्देश (250-255): निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। ये बच्चे उतने बच्चे नहीं कि इनमें कभी-कभी ढूँढ सकें हम अपना बचपन इनकी उम्र तो इनकी असल उम्र से भी ज्यादा लगती है कभी-कभी तो हमसे भी ज्यादा इनकी आत्माओं में गौरेयों के घोंसले नहीं हैं लेकिन नयी ची़जों के बारे में ये हमसे ज्यादा जानते हैं हम जिन तकनीकी उपकरणों के सामने पहुँचते ही अचकचाकर ठिठक जाते हैं – कुण्ठ होकर ये बिना किसी हिचक के दबाना शुरू कर देते हैं उसके बटन न कोई घबराहट, न गलती हो जाने की आशंका विश्वास से भरे हैं इनके चेहरे जिन रास्तों की इन्हें खबर नहीं खोज लेंगे ये ‘जिन रास्तों की इन्हें खबर नहीं है,’ कवि किन रास्तों की ओर संकेत कर रहा है?
Select the related word from the given alternatives: Transport : Goods : : Bank : _______
टेस्ट, ODI और T20I तीनों फॉर्मेट में कम से कम 100 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज़ कौन बन गए हैं?
उत्तर प्रदेश राज्य में ‘टिहरी बाँध परियोजना’ किस देश के सहयोग से पूरा किया गया है।
Two angles of a triangle are in the ratio of 1:2. The third angle is equal to sum of these two, then the third angle is ::
Soon after the birth babies show the signs of ______, which are mostly physiological responses to sensory stimulation. जन्म के तुरंत बाद बच्चे ........... के लक्षण दिखाते हैं, जो ज्यादातर संवेदी उत्तेजना के लिए शारीरिक प्रतिक्रियाएं है। I. Interest/रूचि II. Distress/पीड़ा
Which article of the Indian constitution states that the Union should promote the spread of Hindi and develop Hindi as medium of expression? भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में कहा गया है कि संघ को हिन्दी के प्रसार को बढ़ावा देना चाहिए और हिन्दी को अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में विकसित करना चाहिए?
The right to information in India is:/सूचना का अधिकार भारत में है
IBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप-2023 की मेजबानी किस देश ने की?
निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (1 से 9 तक) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए– मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट सम्बन्धी, मित्र, बन्धु-बांधव जीवनभर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अन्तर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँ। सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने नि:स्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानव जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अन्तर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है। यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को अध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है। ‘नि:स्वार्थ’ शब्द का उपयुक्त विपरीतार्थी शब्द है–
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