Correct Answer:
Option D - ‘‘माता पृथिव्या मूर्तिस्तु’’ इति कथनम् मनुस्मृते: अस्ति है। अर्थात् माता पृथ्वी की मूर्ति है’’ यह कथन मनुस्मृति का है।
1. राम का कथन है–
अपि स्वर्ण मयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।
अर्थात् जननी और जन्मभूमि दोनों सम्माननीय और पूज्य है यह संक्षेप में अभिप्राय है।
2. रामायण - महर्षि आदिकवि वाल्मिकी के द्वारा विरचित रामायण आदि काव्य कहा जाता है, रामायण में 24 हजार श्लोक हैं इसे चतुर्विंशतिसाहस्री संहिता कहा जाता है।
3. मनुस्मृति -
आचार्यो ब्रह्मणो मूर्ति: पिता मूर्ति: प्रजापते:।
माता पृथिव्या मूर्तिस्तु भ्राता स्वोमूर्तिरात्मन:।।
अर्थात्–आचार्य ब्रह्मा की मूर्ति है पिता प्रजापति की मूर्ति है।
माता पृथ्वी की मूर्ति है भ्राता अपनी मूर्ति होता है।
D. ‘‘माता पृथिव्या मूर्तिस्तु’’ इति कथनम् मनुस्मृते: अस्ति है। अर्थात् माता पृथ्वी की मूर्ति है’’ यह कथन मनुस्मृति का है।
1. राम का कथन है–
अपि स्वर्ण मयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।
अर्थात् जननी और जन्मभूमि दोनों सम्माननीय और पूज्य है यह संक्षेप में अभिप्राय है।
2. रामायण - महर्षि आदिकवि वाल्मिकी के द्वारा विरचित रामायण आदि काव्य कहा जाता है, रामायण में 24 हजार श्लोक हैं इसे चतुर्विंशतिसाहस्री संहिता कहा जाता है।
3. मनुस्मृति -
आचार्यो ब्रह्मणो मूर्ति: पिता मूर्ति: प्रजापते:।
माता पृथिव्या मूर्तिस्तु भ्राता स्वोमूर्तिरात्मन:।।
अर्थात्–आचार्य ब्रह्मा की मूर्ति है पिता प्रजापति की मूर्ति है।
माता पृथ्वी की मूर्ति है भ्राता अपनी मूर्ति होता है।