Correct Answer:
Option C - सर्गादौ भगवता परमेश्वरेण सामवेदस्य ज्ञानं आदित्याय दत्तम् अर्थात् सर्ग के आदि में अर्थात् सृष्टि के आदि में भगवान परमेश्वर के द्वारा सामवेद का ज्ञान आदित्य को दिया।
अग्नि वायु रविभ्यस्तु त्रयं ब्रह्म सनातनम् ।
दुदोह यज्ञ सिद्धयर्थं ऋग्यजु: साम लक्षणम्।
उस परमात्मा में जगत् में समस्त धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि व्यवहारों की सिद्धि के लिए अर्थात् जगत के समस्त रूपों के ज्ञान के लिए अग्नि, वायु, रवि से क्रमश: ऋग् - ज्ञान, यजु:- कर्म, साम उपासना रूप ज्ञान वाले नित्य वेदों को दुहकर प्रकट किया तथा अथर्ववेद का ज्ञान अंगिरा को दिया।
वेद – देवत
ऋग्वेद –अग्नि
यजुर्ववेद –वायु
साम – रवि (आदित्य)
अथर्ववेद – अंगिरा
C. सर्गादौ भगवता परमेश्वरेण सामवेदस्य ज्ञानं आदित्याय दत्तम् अर्थात् सर्ग के आदि में अर्थात् सृष्टि के आदि में भगवान परमेश्वर के द्वारा सामवेद का ज्ञान आदित्य को दिया।
अग्नि वायु रविभ्यस्तु त्रयं ब्रह्म सनातनम् ।
दुदोह यज्ञ सिद्धयर्थं ऋग्यजु: साम लक्षणम्।
उस परमात्मा में जगत् में समस्त धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि व्यवहारों की सिद्धि के लिए अर्थात् जगत के समस्त रूपों के ज्ञान के लिए अग्नि, वायु, रवि से क्रमश: ऋग् - ज्ञान, यजु:- कर्म, साम उपासना रूप ज्ञान वाले नित्य वेदों को दुहकर प्रकट किया तथा अथर्ववेद का ज्ञान अंगिरा को दिया।
वेद – देवत
ऋग्वेद –अग्नि
यजुर्ववेद –वायु
साम – रवि (आदित्य)
अथर्ववेद – अंगिरा