Q: निर्देश : नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए। अपने प्रियजनों से रहित राज्य किस काम का? प्यारी मनुष्य–जाति का सुख ही जगत के मंगल का मूल साधन है। बिना उसके सुख के अन्य सारे उपाय निष्फल हैं। धन की पूजा से ऐश्वर्य, तेज, बल और पराक्रम नहीं प्राप्त होने का। चैतन्य आत्मा की पूजा से ही ये पदार्थ प्राप्त होते हैं। चैतन्य–पूजा ही से मनुष्य के कल्याण हो सकता है। समाज का पालन करने वाली दूध की धारा जब मनुष्य का प्रेममय हृदय, निष्कपट मन और मित्रतापूर्ण नेत्रों से निकलकर बहती है तब वही जगत में सुख के खेतों को हरा–भरा और प्रफुल्लित करती है और वही उनमें फल भी लगाती है। Q. ‘सुख के खेत को हरा–भरा और प्रफुल्लित ’ करने का अर्थ है :
A.
जीवन को सुखमय बनाना
B.
जीवन को दुखमय बनाना
C.
खेतों की सिंचाई करना
D.
जीवन को संकट में डालना
Correct Answer:
Option A - दिये गये गद्यांश के अनुसार ‘सुख के खेतों को हरा–भरा और प्रफुल्लित ’ करने का अर्थ– ‘जीवन को सुखमय बनाना’ है।
A. दिये गये गद्यांश के अनुसार ‘सुख के खेतों को हरा–भरा और प्रफुल्लित ’ करने का अर्थ– ‘जीवन को सुखमय बनाना’ है।
Explanations:
दिये गये गद्यांश के अनुसार ‘सुख के खेतों को हरा–भरा और प्रफुल्लित ’ करने का अर्थ– ‘जीवन को सुखमय बनाना’ है।
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