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Q: निर्देश (प्र.सं. 51-54) निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए। शिक्षा को वैज्ञानिक और प्राविधिक मूलाधार देकर हमने जहाँ भौतिक परिवेश को पूर्णतया परिवर्तित कर दिया है और जीवन को अप्रत्याशित गतिशीलता दे दी है, वहाँ साहितय, कला, धर्म और दर्शन को अपनी चेतना से बहिष्कृत कर मानव विकास को एकांगी बना दिया है। पिछली शताब्दी में विकास के सूत्र प्रकृति के हाथ से निकलकर मनुष्य के हाथ में पहुँच गए है, विज्ञान के हाथ में पहुँच गए है और इस बन्द गली में पहुँचने का अर्थ मानव जाति का नाश भी हो सकता है, इसलिए नैतिक और आत्मिक मूल्यों को साथ-साथ विकसित करने की आवश्यकता है, जिससे विज्ञान हमारे लिए भस्मासुर का हाथ न बन जाए। व्यक्ति की क्षुद्रता यदि राष्ट्र की क्षुद्रता बन जाती है, तो विज्ञान भस्मासुर बन जाता है। इस सत्य को प्रत्येक क्षण सामने रखकर ही अणु-विस्फोट को मानव प्रेम और लोकहित की मर्यादा दे सकेंगे। अपरिसीम भौतिक शक्तियों का स्वामी मानव आज अपने व्यक्तित्व के आस्थावान नहीं है और प्रत्येक क्षण अपने अस्तित्व के संबंध में शंकाग्रस्त है।विज्ञान हमारे लिए भस्मासुर का हाथ बन सकता है, क्योंकि–
  • A. मानव आज अपने अस्तित्व के प्रति आस्थावान नहीं है
  • B. नैतिक और आत्मिक मूल्यों का साथ-साथ विकास नहीं हो रहा है
  • C. आज मानव प्रत्येक क्षण अपने अस्तित्व के संबंध में शंकाग्रस्त है
  • D. विकास के सूत्र विज्ञान के हाथ में पहुँच गए है
Correct Answer: Option B - गद्यांश के अनुसार- विज्ञान हमरे लिए भस्मासुर का हाथ बन सकता है क्योंकि- नैतिक एवं आत्मिक मूल्यों का साथ-साथ विकास नहीं हो रहा है।
B. गद्यांश के अनुसार- विज्ञान हमरे लिए भस्मासुर का हाथ बन सकता है क्योंकि- नैतिक एवं आत्मिक मूल्यों का साथ-साथ विकास नहीं हो रहा है।

Explanations:

गद्यांश के अनुसार- विज्ञान हमरे लिए भस्मासुर का हाथ बन सकता है क्योंकि- नैतिक एवं आत्मिक मूल्यों का साथ-साथ विकास नहीं हो रहा है।