Correct Answer:
Option B - चिंतितवान् इत्यस्मिं शब्दे ‘क्तवतु’ प्रत्यय: अस्ति । अर्थात्- ‘चिन्तितवान्’ नामक शब्द में क्तवतु प्रत्यय है। यह प्रत्यय भूतकाल का वाचक है। इसका प्रयोग हमेशा कर्तृवाच्य (कर्तरि प्रयोग) में किया जाता है। इसमें धातु को गुण या वृद्धि नहीं होती, सम्प्रसारण होता है। ‘क्तवतु’ का ‘तवत्’ शेष बचता है।
B. चिंतितवान् इत्यस्मिं शब्दे ‘क्तवतु’ प्रत्यय: अस्ति । अर्थात्- ‘चिन्तितवान्’ नामक शब्द में क्तवतु प्रत्यय है। यह प्रत्यय भूतकाल का वाचक है। इसका प्रयोग हमेशा कर्तृवाच्य (कर्तरि प्रयोग) में किया जाता है। इसमें धातु को गुण या वृद्धि नहीं होती, सम्प्रसारण होता है। ‘क्तवतु’ का ‘तवत्’ शेष बचता है।