Correct Answer:
Option C - सन्तापं ‘यो विमर्शं कार्यं करोति’ न प्राप्नुयात्। अर्थात्- जो विचार करके कार्य करता है, उसे संताप नहीं प्राप्त होता। प्रस्तुत वाक्यांश में ‘करोति’ पद आया है, जो ‘कृ’ (करना) धातु परस्मैपदी प्रथम पुरुष, एकवचन के अन्तर्गत आता है।
C. सन्तापं ‘यो विमर्शं कार्यं करोति’ न प्राप्नुयात्। अर्थात्- जो विचार करके कार्य करता है, उसे संताप नहीं प्राप्त होता। प्रस्तुत वाक्यांश में ‘करोति’ पद आया है, जो ‘कृ’ (करना) धातु परस्मैपदी प्रथम पुरुष, एकवचन के अन्तर्गत आता है।