Correct Answer:
Option D - दधीचे: ‘ऋषय: तपोवने तपस्यां कुर्वन्ति स्म’। महर्षि दधीचि ऋषियो के साथ तपोवन में तपस्या करते थे।
नोट- किसी भी धातु के लट्लकार को लङ्लकार में बदलने के दो नियम हैं।
(a) लट्लकार के स्थान पर लङ्लकार का रूप लिखना चाहिए।
जैसे- भवति का अभवत्।
(b) लट्लकार के रूप के पश्चात् ‘स्म’ लगा देने पर भी लङ्लकार का अर्थ देता है।
जैसे- भवति का भवति स्म, पठति का पठति स्म।
D. दधीचे: ‘ऋषय: तपोवने तपस्यां कुर्वन्ति स्म’। महर्षि दधीचि ऋषियो के साथ तपोवन में तपस्या करते थे।
नोट- किसी भी धातु के लट्लकार को लङ्लकार में बदलने के दो नियम हैं।
(a) लट्लकार के स्थान पर लङ्लकार का रूप लिखना चाहिए।
जैसे- भवति का अभवत्।
(b) लट्लकार के रूप के पश्चात् ‘स्म’ लगा देने पर भी लङ्लकार का अर्थ देता है।
जैसे- भवति का भवति स्म, पठति का पठति स्म।