Correct Answer:
Option B - ‘गङ्गाम् उभयत: द्रुमै: सुशोभिता: ग्रामा: आसन्’।गङ्गा के दोनों ओर वृक्षों से सुशोभित गाँव थे।
वार्तिक- उभसर्वतसो: कार्याधिगुपर्यादिषु त्रिषु।
द्वितीयाम्रेडितान्तेषु ततोन्यत्रापि दृश्यते।।
उभयत: कृष्णं गोपा:। सर्वत: कृष्णम् । धिक् कृष्णभक्तम्। उपर्युपरि लोकं हरि:। अध्यधि लोकम्। अधोऽधो लोकम्। जब उभ और सर्व शब्द से परे ‘तस्’ प्रत्यय होता है तो उसके योग में द्वितीया विभक्ति होती है। धिक् के योग मे द्वितीया होती है। उपरि, अधि तथा अध: की आम्रेडित संज्ञा होने पर भी द्वितीया विभक्ति होती है।
उदाहरण- गङ्गाम् उभयत: द्रुमै: सुशोभिता: ग्रामा: आसन् में उभयत: के प्रयोग के कारण वार्तिक सूत्र-‘उभसर्वतसो....’ से गङ्गाम् मेंं द्वितीया विभक्ति हुई है।
B. ‘गङ्गाम् उभयत: द्रुमै: सुशोभिता: ग्रामा: आसन्’।गङ्गा के दोनों ओर वृक्षों से सुशोभित गाँव थे।
वार्तिक- उभसर्वतसो: कार्याधिगुपर्यादिषु त्रिषु।
द्वितीयाम्रेडितान्तेषु ततोन्यत्रापि दृश्यते।।
उभयत: कृष्णं गोपा:। सर्वत: कृष्णम् । धिक् कृष्णभक्तम्। उपर्युपरि लोकं हरि:। अध्यधि लोकम्। अधोऽधो लोकम्। जब उभ और सर्व शब्द से परे ‘तस्’ प्रत्यय होता है तो उसके योग में द्वितीया विभक्ति होती है। धिक् के योग मे द्वितीया होती है। उपरि, अधि तथा अध: की आम्रेडित संज्ञा होने पर भी द्वितीया विभक्ति होती है।
उदाहरण- गङ्गाम् उभयत: द्रुमै: सुशोभिता: ग्रामा: आसन् में उभयत: के प्रयोग के कारण वार्तिक सूत्र-‘उभसर्वतसो....’ से गङ्गाम् मेंं द्वितीया विभक्ति हुई है।