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Q: नयी-नयी काव्यधाराओं के अनेकानेक कवियों को प्रकाशित करके भी उनकी सर्वाधिक आलोचना के पात्र बन जाने वाले कवि हैं-
  • A. नेमिचन्द्र जैन
  • B. गिरिजाकुमार माथुर
  • C. धर्मवीर भारती
  • D. अज्ञेय
Correct Answer: Option D - नयी-नयी काव्य धाराओं के अनेकानेक कवियों को प्रकाशित करके भी उनकी सर्वाधिक आलोचना के पात्र बन जाने वाले कवि अज्ञेय है। सन् 1964 ई. में ‘आँगन के पार द्वार’ पर उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ और 1978 में ‘कितनी नावों में कितनी बार’ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार। इनके द्वारा रचित कविता संग्रह है– भग्नदूत, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणमय प्रभामय, सागर मुद्रा आदि।
D. नयी-नयी काव्य धाराओं के अनेकानेक कवियों को प्रकाशित करके भी उनकी सर्वाधिक आलोचना के पात्र बन जाने वाले कवि अज्ञेय है। सन् 1964 ई. में ‘आँगन के पार द्वार’ पर उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ और 1978 में ‘कितनी नावों में कितनी बार’ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार। इनके द्वारा रचित कविता संग्रह है– भग्नदूत, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणमय प्रभामय, सागर मुद्रा आदि।

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नयी-नयी काव्य धाराओं के अनेकानेक कवियों को प्रकाशित करके भी उनकी सर्वाधिक आलोचना के पात्र बन जाने वाले कवि अज्ञेय है। सन् 1964 ई. में ‘आँगन के पार द्वार’ पर उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ और 1978 में ‘कितनी नावों में कितनी बार’ पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार। इनके द्वारा रचित कविता संग्रह है– भग्नदूत, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये, अरी ओ करुणमय प्रभामय, सागर मुद्रा आदि।