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Q: ‘‘प्रतीहारानुपकरण संभार संग्रहार्थमादिदेश’’ यहाँ उपकरण पद की व्युत्पत्ति है
  • A. उप + कृ + घञ्
  • B. उप + कृ + ल्युट्
  • C. उप + कृ + ण्वुल
  • D. उप + कृ + तृच
Correct Answer: Option B - –‘‘प्रतीहारानुपकरण संभार संग्रहार्थमादिदेश’’ यहाँ उपकरण पद की व्युत्पत्ति है- उप उपसर्ग + कृ धातु + ल्युट् प्रत्यय ल्युट् प्रत्यय के टकार की ‘हलन्त्यम्’ से तथा लकार की ‘लशक्वतद्धिते’ से इत्संज्ञा एवं ‘तस्य लोप:’ से इत्संज्ञक वर्ण टकार और लकार का लोप प्राप्त हुआ और ‘यु’ शेष बचता है। ‘युवोरनाकौ’ इस सूत्र से यु को ‘अन’ आदेश होता है। ल्युट् प्रत्यय नित्य रूप से नपुसंकलिङ्ग में देखे जाते है। उप + कृ + ल्युट् = उपकरणं
B. –‘‘प्रतीहारानुपकरण संभार संग्रहार्थमादिदेश’’ यहाँ उपकरण पद की व्युत्पत्ति है- उप उपसर्ग + कृ धातु + ल्युट् प्रत्यय ल्युट् प्रत्यय के टकार की ‘हलन्त्यम्’ से तथा लकार की ‘लशक्वतद्धिते’ से इत्संज्ञा एवं ‘तस्य लोप:’ से इत्संज्ञक वर्ण टकार और लकार का लोप प्राप्त हुआ और ‘यु’ शेष बचता है। ‘युवोरनाकौ’ इस सूत्र से यु को ‘अन’ आदेश होता है। ल्युट् प्रत्यय नित्य रूप से नपुसंकलिङ्ग में देखे जाते है। उप + कृ + ल्युट् = उपकरणं

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–‘‘प्रतीहारानुपकरण संभार संग्रहार्थमादिदेश’’ यहाँ उपकरण पद की व्युत्पत्ति है- उप उपसर्ग + कृ धातु + ल्युट् प्रत्यय ल्युट् प्रत्यय के टकार की ‘हलन्त्यम्’ से तथा लकार की ‘लशक्वतद्धिते’ से इत्संज्ञा एवं ‘तस्य लोप:’ से इत्संज्ञक वर्ण टकार और लकार का लोप प्राप्त हुआ और ‘यु’ शेष बचता है। ‘युवोरनाकौ’ इस सूत्र से यु को ‘अन’ आदेश होता है। ल्युट् प्रत्यय नित्य रूप से नपुसंकलिङ्ग में देखे जाते है। उप + कृ + ल्युट् = उपकरणं