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Q: प्रयोगवादी कवियों की रचनायें, किस सप्तक में संगृहीत हैं?
  • A. तार सप्तक
  • B. दूसरा सप्तक
  • C. तीसरा सप्तक
  • D. चौथा सप्तक
Correct Answer: Option A - प्रयोगवादी कवियों की रचनाएँ `तारसप्तक' में संगृहीत हैं। हिन्दी में प्रयोगवाद का प्रारम्भ सन् 1943 ई. में `अज्ञेय' द्वारा सम्पादित तार सप्तक के प्रकाशन से माना जाता है। `तार-सप्तक' के कवि – नेमिचन्द जैन, गजानन माधव ``मुक्तिबोध'' भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, प्रभाकर माचवे। प्रयोगवादी कवि कविता में प्रयोग करने में विश्वास करते थे।
A. प्रयोगवादी कवियों की रचनाएँ `तारसप्तक' में संगृहीत हैं। हिन्दी में प्रयोगवाद का प्रारम्भ सन् 1943 ई. में `अज्ञेय' द्वारा सम्पादित तार सप्तक के प्रकाशन से माना जाता है। `तार-सप्तक' के कवि – नेमिचन्द जैन, गजानन माधव ``मुक्तिबोध'' भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, प्रभाकर माचवे। प्रयोगवादी कवि कविता में प्रयोग करने में विश्वास करते थे।

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प्रयोगवादी कवियों की रचनाएँ `तारसप्तक' में संगृहीत हैं। हिन्दी में प्रयोगवाद का प्रारम्भ सन् 1943 ई. में `अज्ञेय' द्वारा सम्पादित तार सप्तक के प्रकाशन से माना जाता है। `तार-सप्तक' के कवि – नेमिचन्द जैन, गजानन माधव ``मुक्तिबोध'' भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, प्रभाकर माचवे। प्रयोगवादी कवि कविता में प्रयोग करने में विश्वास करते थे।