Correct Answer:
Option A - प्रयोगवादी कवियों की रचनाएँ `तारसप्तक' में संगृहीत हैं। हिन्दी में प्रयोगवाद का प्रारम्भ सन् 1943 ई. में `अज्ञेय' द्वारा सम्पादित तार सप्तक के प्रकाशन से माना जाता है। `तार-सप्तक' के कवि – नेमिचन्द जैन, गजानन माधव ``मुक्तिबोध'' भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, प्रभाकर माचवे। प्रयोगवादी कवि कविता में प्रयोग करने में विश्वास करते थे।
A. प्रयोगवादी कवियों की रचनाएँ `तारसप्तक' में संगृहीत हैं। हिन्दी में प्रयोगवाद का प्रारम्भ सन् 1943 ई. में `अज्ञेय' द्वारा सम्पादित तार सप्तक के प्रकाशन से माना जाता है। `तार-सप्तक' के कवि – नेमिचन्द जैन, गजानन माधव ``मुक्तिबोध'' भारत भूषण अग्रवाल, गिरिजा कुमार माथुर, अज्ञेय, रामविलास शर्मा, प्रभाकर माचवे। प्रयोगवादी कवि कविता में प्रयोग करने में विश्वास करते थे।