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Q: ‘‘ऋतुवर्णन तो इनके ऐसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया है।’’– आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का यह कथन किस कवि के लिए है?
  • A. बिहारी
  • B. घनान्दन
  • C. सेनापति
  • D. पद्माकर
Correct Answer: Option C - व्याख्या : ‘ऋतु वर्णन तो इनके ऐसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया है’। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का यह कथन सेनापति के लिए है। सेनापति ब्रजभाषा के रामभक्त कवि है। इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार ‘श्लेष’ है। इनके द्वारा रचित ग्रन्थ हैं- कवित्तरत्नाकर, काव्य कल्पद्रुम।
C. व्याख्या : ‘ऋतु वर्णन तो इनके ऐसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया है’। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का यह कथन सेनापति के लिए है। सेनापति ब्रजभाषा के रामभक्त कवि है। इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार ‘श्लेष’ है। इनके द्वारा रचित ग्रन्थ हैं- कवित्तरत्नाकर, काव्य कल्पद्रुम।

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व्याख्या : ‘ऋतु वर्णन तो इनके ऐसा और किसी शृंगारी कवि ने नहीं किया है’। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का यह कथन सेनापति के लिए है। सेनापति ब्रजभाषा के रामभक्त कवि है। इनका सर्वाधिक प्रिय अलंकार ‘श्लेष’ है। इनके द्वारा रचित ग्रन्थ हैं- कवित्तरत्नाकर, काव्य कल्पद्रुम।