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Q: सी.आर. दास की मृत्यु के बाद स्वराज पार्टी का दलों में विभाजन हो गया था और प्रतिक्रियावादी दल ने ...............द्वारा/के लिए कार्य किया।
  • A. ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग करके हिंदू हितों की रक्षा
  • B. असंतुष्टों के रूप में कार्य करके विधायी कार्यों में बाधा उत्पन्न करना
  • C. गाँधी के रचनात्मक कार्यों के पक्ष में कांग्रेस के अपरिवर्तनवादियों से सहयोग
  • D. कांग्रेस के भीतर पार्टी की अलग पहचान बनाए रखना
Correct Answer: Option A - सी.आर. दास और पण्डित मोतीलाल नेहरू ने मार्च 1923 ई. को इलाहाबाद मेें कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी जिसे सामान्यत: ‘स्वराज पार्टी’ के नाम से जाना जाता था की स्थापना की थी। 16 जून 1925 को सी.आर. दास की मृत्यु के बाद स्वराज दल की शक्ति क्षीण होने लगी, पार्टी में साम्प्रदायिक भावनाओं तथा सरकार के साथ सहयोग करने वालों की संख्या में वृद्धि होने लगी। प्रत्युत्तरवादी गुट हिन्दू हितों की रक्षा के लिए सरकार का सहयोग करने लगे।
A. सी.आर. दास और पण्डित मोतीलाल नेहरू ने मार्च 1923 ई. को इलाहाबाद मेें कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी जिसे सामान्यत: ‘स्वराज पार्टी’ के नाम से जाना जाता था की स्थापना की थी। 16 जून 1925 को सी.आर. दास की मृत्यु के बाद स्वराज दल की शक्ति क्षीण होने लगी, पार्टी में साम्प्रदायिक भावनाओं तथा सरकार के साथ सहयोग करने वालों की संख्या में वृद्धि होने लगी। प्रत्युत्तरवादी गुट हिन्दू हितों की रक्षा के लिए सरकार का सहयोग करने लगे।

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सी.आर. दास और पण्डित मोतीलाल नेहरू ने मार्च 1923 ई. को इलाहाबाद मेें कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी जिसे सामान्यत: ‘स्वराज पार्टी’ के नाम से जाना जाता था की स्थापना की थी। 16 जून 1925 को सी.आर. दास की मृत्यु के बाद स्वराज दल की शक्ति क्षीण होने लगी, पार्टी में साम्प्रदायिक भावनाओं तथा सरकार के साथ सहयोग करने वालों की संख्या में वृद्धि होने लगी। प्रत्युत्तरवादी गुट हिन्दू हितों की रक्षा के लिए सरकार का सहयोग करने लगे।