Correct Answer:
Option C - राजपदाधिकारियों के लिए दो पदों सचिव और मन्त्री का उल्लेख गुप्तकाल के शासकों के अभिलेखों में हुआ है। गुप्त शासन का केन्द्र बिन्दु राजा था। गुप्त शासक महाराजाधिराज और परमभट्टारक जैसी उपाधियाँ धारण करते थे। राजा की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होती थी जिसके ज्यादातर सदस्य उच्च वर्ग के होते थे। इन्हें अमात्य कहा जाता था। मंत्रियों का पद अधिकांशत: अनुवांशिक होता था। एक ही मंत्री के पास कई विभाग होते थे। उदाहरणार्थ- हरिषेण तीन पदों सन्धिविग्रहिक, कुमारामात्य एवं महादण्डनायक के पदों पर आसीन था।
C. राजपदाधिकारियों के लिए दो पदों सचिव और मन्त्री का उल्लेख गुप्तकाल के शासकों के अभिलेखों में हुआ है। गुप्त शासन का केन्द्र बिन्दु राजा था। गुप्त शासक महाराजाधिराज और परमभट्टारक जैसी उपाधियाँ धारण करते थे। राजा की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होती थी जिसके ज्यादातर सदस्य उच्च वर्ग के होते थे। इन्हें अमात्य कहा जाता था। मंत्रियों का पद अधिकांशत: अनुवांशिक होता था। एक ही मंत्री के पास कई विभाग होते थे। उदाहरणार्थ- हरिषेण तीन पदों सन्धिविग्रहिक, कुमारामात्य एवं महादण्डनायक के पदों पर आसीन था।