Explanations:
‘सरस्वतीकण्ठाभरणम्’ के रचयिता भोजराज हैं। भोज में शृंगार प्रकाश की रचना की थी। अभिनव गुप्त कश्मीर के निवासी थे तथा शिव के भक्त थे। ‘परात्रिंशिका की टीका तथा ईश्वर प्रत्यभिज्ञा विवृतिविमर्शिनी’ के अन्त में उन्होंने अपना परिचय दिया है। उनका ग्रन्थ ‘तन्त्रालोक’ उत्कृष्ठ कृति है।