Correct Answer:
Option B - शकुन्तला की अँगूठी शचीतीर्थ पर गिरी थी। शकुन्तला जब पतिगृह जाती है तो दुष्यन्त उसको पहचान नहीं पाता शकुन्तला अँगूठी दिखाने का प्रयास करती है तो अँगूठी उसके हाथ में नहीं रहती इसी समय गौतमी कहती है- ‘नूनं ते शक्रावताराभ्यन्तरे शचीतीर्थसलिलं बन्दमानाया: प्रभ्रष्टाङ्गुलीयकम्।’ अर्थात् - अवश्य ही शक्रावतार तीर्थ में शचीतीर्थ के जल की वन्दना करते समय तेरी (शकुन्तला) अँगूठी गिर गई है। यह कथा अभिज्ञान के पाँचवे अंक में वर्णित है।
B. शकुन्तला की अँगूठी शचीतीर्थ पर गिरी थी। शकुन्तला जब पतिगृह जाती है तो दुष्यन्त उसको पहचान नहीं पाता शकुन्तला अँगूठी दिखाने का प्रयास करती है तो अँगूठी उसके हाथ में नहीं रहती इसी समय गौतमी कहती है- ‘नूनं ते शक्रावताराभ्यन्तरे शचीतीर्थसलिलं बन्दमानाया: प्रभ्रष्टाङ्गुलीयकम्।’ अर्थात् - अवश्य ही शक्रावतार तीर्थ में शचीतीर्थ के जल की वन्दना करते समय तेरी (शकुन्तला) अँगूठी गिर गई है। यह कथा अभिज्ञान के पाँचवे अंक में वर्णित है।