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Q: श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार कर्मयोगी को कर्म क्यों करना चाहिए?
  • A. कीर्ति के लिए
  • B. लोकसंग्रह के लिए
  • C. सुख के लिए
  • D. लोकत्याग के लिए
Correct Answer: Option B - `श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार कर्मयोगी को कर्म लोकसंग्रह के लिए करना चाहिए। गीता अध्याय तीन श्लोक 25 में श्रीकृष्ण कहते हैं – सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।25।। हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार (कर्म) करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान् (भी) लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार (कर्म) करे।
B. `श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार कर्मयोगी को कर्म लोकसंग्रह के लिए करना चाहिए। गीता अध्याय तीन श्लोक 25 में श्रीकृष्ण कहते हैं – सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।25।। हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार (कर्म) करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान् (भी) लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार (कर्म) करे।

Explanations:

`श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार कर्मयोगी को कर्म लोकसंग्रह के लिए करना चाहिए। गीता अध्याय तीन श्लोक 25 में श्रीकृष्ण कहते हैं – सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।25।। हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार (कर्म) करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान् (भी) लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार (कर्म) करे।