Correct Answer:
Option B - `श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार कर्मयोगी को कर्म लोकसंग्रह के लिए करना चाहिए। गीता अध्याय तीन श्लोक 25 में श्रीकृष्ण कहते हैं –
सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।25।।
हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार (कर्म) करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान् (भी) लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार (कर्म) करे।
B. `श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार कर्मयोगी को कर्म लोकसंग्रह के लिए करना चाहिए। गीता अध्याय तीन श्लोक 25 में श्रीकृष्ण कहते हैं –
सक्ता: कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ।।25।।
हे भारत! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार (कर्म) करते हैं, आसक्तिरहित विद्वान् (भी) लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार (कर्म) करे।