search
Q: शुद्ध-वाक्यं चिनुत–
  • A. तण्डुलै ओदनं पचति
  • B. तण्डुलेन ओदनं पचति
  • C. तण्डुलान् ओदनं पचति
  • D. एकाधिकविकल्पा उपयुक्ता:
  • E. न कोऽपि उपयुक्त:
Correct Answer: Option C - ``तण्डुलान् ओदनं पचति'' इदम् शुद्धं वाक्यं अस्ति प्रश्नानुसार `तण्डुलान् ओदनं पचति' यह वाक्य शुद्ध है। यहाँ `तण्डुलान्' पद की ``अकथितं च'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर `कर्मणि द्वितीया' सूत्र से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। इसे गौण कर्म कहते हैं। यहाँ प्रधान कर्म ओदनं हैै। यहाँ ``कर्तुरीप्सिततमं कर्म'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर कर्मणि द्वितीया से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। अत: विकल्प (c) समुचित है।
C. ``तण्डुलान् ओदनं पचति'' इदम् शुद्धं वाक्यं अस्ति प्रश्नानुसार `तण्डुलान् ओदनं पचति' यह वाक्य शुद्ध है। यहाँ `तण्डुलान्' पद की ``अकथितं च'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर `कर्मणि द्वितीया' सूत्र से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। इसे गौण कर्म कहते हैं। यहाँ प्रधान कर्म ओदनं हैै। यहाँ ``कर्तुरीप्सिततमं कर्म'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर कर्मणि द्वितीया से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। अत: विकल्प (c) समुचित है।

Explanations:

``तण्डुलान् ओदनं पचति'' इदम् शुद्धं वाक्यं अस्ति प्रश्नानुसार `तण्डुलान् ओदनं पचति' यह वाक्य शुद्ध है। यहाँ `तण्डुलान्' पद की ``अकथितं च'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर `कर्मणि द्वितीया' सूत्र से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। इसे गौण कर्म कहते हैं। यहाँ प्रधान कर्म ओदनं हैै। यहाँ ``कर्तुरीप्सिततमं कर्म'' सूत्र से कर्म संज्ञा होकर कर्मणि द्वितीया से द्वितीया विभक्ति का विधान होता है। अत: विकल्प (c) समुचित है।